Search
Close this search box.

जल जंगल जमीन के संरक्षण का हक आदिवासियों का नहीं तो : वन संरक्षण पर अधिकारियों का भ्रष्टाचार कैसे.. क्या केंद्र सरकार है लापरवाह?..

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

यह कहना अति-मूर्खता होगी की वृक्षों और वन्य जीवों के संरक्षण कितना आवश्यक है? भारत सरकार प्रतिवर्ष जंगल और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए यूपीएससी जैसी अहम परीक्षाओं के द्वारा उच्च अधिकारियों की नियुक्ति करती है, समस्त अधिकारी भ्रष्टाचारी नहीं अपितु जो है उनके लिए केंद्र सरकार सजग नहीं। संपूर्ण देश के लिए ऐसे भ्रष्टाचार बेहद संवेदनशील..

बालोद। प्रकाश सिंह : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के कृत्य कि शिकायत एक व्यक्ति ने वन विभाग के अधिकारी से की है। शिकायकर्ता का आरोप है कि बेसकीमती सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई कराकर उससे अपने लिए टी-टेबल, ड्रेसिंग टेबल और अन्य फर्नीचर तैयार करवाए गए। 

 

इस मामले में तत्कालीन वनमंडल अधिकारी (DFO), रेंजर, डिप्टी रेंजर सहित कई अधिकारियों की संलिप्तता की बात सामने आ रही है। हैरानी की बात यह है कि अवैध रूप से काटी गई सागौन की लकड़ी को सुरक्षित वन विभाग के गोदाम में लाया गया और यहीं से आरा-मिल में चिरान कराकर कारपेंटर तक पहुंचाया गया। मामले की शिकायत पर रायपुर से बालोद पहुंचकर टीम ने काष्ठागार में रखी सागौन की लकड़ी और कारपेंटर के यहां से तैयार चिरान को जब्त कर लिया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन वनमंडल अधिकारी अभिषेक अग्रवाल के निर्देश पर डौंडी रेंजर जीवन लाल भोंडेकर को आदेश दिए गए, जिसके बाद पूरे अवैध खेल को अंजाम दिया गया। बताया जा रहा है कि डौंडी परिक्षेत्र के बीटेझर बिट से यह कीमती सागौन की लकड़ी भेजी गई थी। अधिकारियों को खुश करने के लिए उड़नदस्ता की गाड़ी से बिट गार्ड ईश्वर साहू के माध्यम से लकड़ी रवाना की गई।

इस पूरे मामले में जब एसडीओ जीवन लाल सिन्हा से संपर्क किया गया तो उन्होंने बाद में जानकारी देने की बात कहकर जवाब देने से बचने की कोशिश की, जिससे संदेह और गहरा गया है, आज फिर रायपुर से वरिष्ठ अधिकारी मामले की विस्तृत जांच के लिए बालोद पहुंच रहे हैं। जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होती है या नहीं यह गंभीर विषय है।



admin
Author: admin

Leave a Comment

और पढ़ें

15 Best News Portal Development Company In India