रायपुर ब्युरो : सरगुजा संभाग का यह काला दिवस 22 जुलाई 2019 को जनता कभी भुला नहीं सकती, छत्तीसगढ़ के लगभग सभी मीडिया हाउस के द्वारा पुलिस अभिरक्षा में एक नौजवान के मौत की खबर यूं ही दौड़ पड़ी थी परंतु दुर्भाग्यवश जिस प्रकार संक्रामक बीमारी कोरोना आई और चले गई परिणाम स्वरूप लोग मास्क और सैनिटाइजर को तो भूल ही गए वैसे ही पीड़ित और पीड़ित परिवार को जो कष्ट झेलना पड़ता है यह उन्हीं के संज्ञान में होती है।
प्रदेश के बहुचर्चित पंकज बेक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्यायिक प्रक्रिया ने यू-टर्न ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर सरगुजा की अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता राजवर्धन सिंह द्वारा प्रस्तुत पुनरीक्षण याचिका को न केवल सुना, बल्कि माननीय न्यायालय ने विषय को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच के लिए आदेशित किया। जनपड़ताल में भारी संख्या पर यह वक्तव्य सामने आया की न्याय व्यवस्था में अवश्य विश्वास रखें और सच्चाई पर अड़िग रहें।
माननीय न्यायालय का रुख कड़ा :
प्राप्त जानकारी और दस्तावेज़ों के अनुसार, अदालत ने इस प्रकरण पर पूर्व में हुई जांच की खामियों पर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा, पुलिस अधीक्षक सरगुजा की देखरेख में एक विशेष जांच टीम गठित करें और इस पूरे मामले की पुनः विवेचना कराएं वहीं अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि स्थानीय पुलिस स्तर पर निष्पक्ष जांच में कोई बाधा आती है या सक्षम नहीं पाई जाती है तो इस प्रकरण की संपूर्ण कार्यवाही को ‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो'(CBI) को सौंपा जाए। आदेश के तहत विचारण न्यायालय के अभिलेख वापस लेने और उसकी प्रति IG सरगुजा को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की न्यायिकरण तथ्यों के आधार पर :
दस्तावेज़ों के अनुसार पंकज बेक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। पुलिस का दावा था कि पूछताछ के दौरान वह आरक्षक को चकमा देकर फरार हो गया और बाद में ‘परमार अस्पताल’ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि, मृतक के परिजनों और अधिवक्ता राजवर्धन सिंह द्वारा इस कहानी पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
(Medical Report said- Cause of death to the best of my knowledge and belief is a) Immediate cause Cardio-respiratory failure as a result of Asphyxia) पूर्व की जांच में मौत का कारण ‘असफिक्सिया’ (दम घुटना) बताया गया था, लेकिन शरीर पर मौजूद चोटों और परिस्थितियों को लेकर जो तर्क अधिवक्ता राजवर्धन सिंह ने अदालत के समक्ष रखे, जिस आधार पर न्यायिक मान्यता प्राप्त हो चुकी है।
जिला सरगुजा के सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा पुनरीक्षण याचिका स्वीकार किया जाना पुलिस और जांच एजेंसियों के साथ-साथ सरगुजा के मेडिकल विशेषज्ञों पर भी सवालिया निशान है। अधिवक्ता राजवर्धन सिंह के तर्कों ने इस मामले के उन पहलुओं को उजागर किया है, जो अब तक जांच से ओझल थे।
जिले के प्रबुद्ध वर्ग और आम नागरिक अब इस नई जांच पर पैनी नजर रखे हुए हैं। क्या यह जांच पुलिस अभिरक्षा में हुई इस संदिग्ध मौत की असल सच्चाई सामने लाएगी? यह आने वाले समय स्पष्ट करेगा।










