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कभी स्कूल नहीं गईं,फिर भी बनीं डॉक्टर : पंडवानी की अमर आवाज तीजन बाई पंचतत्व में विलिन..

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रायपुर। प्रकाश सिंह : पंडवानी की महान साधिका और पद्म विभूषण सम्मानित डॉ. तीजन बाई के निधन के साथ भारतीय लोककला का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। अपने जीवन में उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा और समर्पण के सामने औपचारिक शिक्षा भी छोटी पड़ जाती है। कभी स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंचीं तीजन बाई को उनके असाधारण योगदान के लिए विश्वविद्यालय ने मानद डी.लिट. (डॉक्टरेट) की उपाधि से सम्मानित किया था।

24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके नाना ब्रजलाल महाभारत की कथाएं गाया करते थे। तीजन बाई छिपकर उन्हें सुनतीं और याद कर लेती थीं। एक दिन नाना ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें पंडवानी की शिक्षा देना शुरू किया। यही सीख आगे चलकर उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी पहचान बन गई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

छत्तीसगढ़ के सीएम चिंतन शिविर में थे। जैसे ही उन्हें तीजन बाई के निधन की जानकारी हुई वह शिविर को छोड़कर रायपुर एम्स पहुंचकर तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा- तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी अद्वितीय कला-साधना और विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। राज्य सरकार की ओर से उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने लिखा- आज पंडवानी का एक सुर सदा के लिए शांत हो गया है। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सशक्त प्रतीक, पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से अलंकृत, विश्वविख्यात पंडवानी की अप्रतिम साधिका तीजन बाई का देहांत छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना के लिए एक अपूरणीय क्षति है। तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाते हुए अनगिनत कलाकारों को प्रेरणा प्रदान की। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीधाम में स्थान प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिजनों को यह असीम दुख सहने की शक्ति दें।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा- छत्तीसगढ़ की अनमोल रत्न, महान पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश में कला और संस्कृति की बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने गायन से पंडवानी विधा को सजीव रखा और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। हम सब आज उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिजनों व प्रशंसकों को संबल दे।



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