सुशासन का अर्थ यही है की जनता सरकार के कार्यों से लगभग संतुष्ट रहे, परंतु जनता की राय इससे परे हैं वही विपक्ष का तो बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रहा है कि जब भी सत्ता पक्ष द्वारा किसी भी प्रकार की अराजकता प्रतीत होती है तो उसका पुरजोर विरोध करें जैसा कि आज बारिश के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा द्वारा देखा गया जिसकी सरगुजा ही नहीं अपितु पूरे देश में अत्यंत से भी ज्यादा आवश्यक है।
अंबिकापुर। प्रकाश सिंह : सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी ने भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों से जुड़े विभिन्न मामलों में पुलिस पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने का आरोप लगाते हुए सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने तीन प्रमुख मामलों में निष्पक्ष जांच, त्वरित एफआईआर और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
आज सोमवार जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में रैली निकली जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने बारिश के बीच आईजी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कांग्रेस ने कलाकेंद्र मैदान आवंटन प्रकरण से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के ऑडियो पर कार्रवाई न होने का मुद्दा उठाया। पार्टी का दावा है कि ऑडियो में भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया, महापौर मंजूषा भगत और अनुराग मिश्रा के बीच बातचीत है। महापौर ने ऑडियो को एआई से तैयार बताया है। कांग्रेस ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है।
ज्ञापन द्वारा सरगुजा संभाग में बढ़ते अपराध पर कोई नियंत्रण नहीं के साथ भिट्ठीकला जमीन विवाद का भी उल्लेख है। कांग्रेस का आरोप है कि उप जिलाधिकारी जांच में एक विधवा महिला की जमीन से धोखाधड़ी के दस्तावेजी प्रमाण मिले हैं। कलेक्टर के कार्रवाई निर्देश के बावजूद आरोपियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।कांग्रेस ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो से जुड़े नायब तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले को भी उठाया। पार्टी का कहना है कि शासकीय कर्मचारी से मारपीट के आरोप में गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज है।
इसके बावजूद गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। कांग्रेस ने मांग की कि इन सभी मामलों में बिना पक्षपात के कानूनी कार्रवाई हो। दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। पार्टी ने चेतावनी दी कि प्रभावी कार्रवाई न होने पर आम लोगों का कानून व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित होगा।











