मुंबई। छत्तीसगढ़ के इस युवा ने अपने परिश्रम से और कई कठिनाइयों को झेलते हुए सफलता केे मुकाम पर पहुंच सा गया है, क्योंकि रायगढ़ के अनिल सिंह चंदेल की एक मूवी मिड-डे मिल बड़े पर्दे पर लॉन्च हुई है, जो दर्शकों नेे काफी पसंंद किया और यह निरंंतर जारी भी है।

बता दें कि अनिल सिंह चंदेल की फिल्म मिड-डे मिल 14 अक्टूबर को बड़े पर्दे पर मूवी लॉन्च हो गई है। इस फिल्म का निर्देशन और निर्माता भी खुद ही हैं। व्याप्त है कि बॉलीवुड में जगह बनाना इतना आसान नहीं, परंतु अनिल एक किसान के बेटे होने के बावजूद जिनकी आय का साधन सिर्फ पिता थे। पर अनिल ने अपना लक्ष्य साध लिया और इसे पुरा करने में भी कोई कसर ना छोड़ी, एक प्रोडक्शन हाउस की शुुुरुआत की और इनके निर्देशन में यह फिल्म बनी, फलस्वरूप बेहद पसंद भी की जा रही है।
बता दें कि यह फिल्म स्कूल में बच्चों को दी जाने वाली मिड-डे मील में हो रही धांधली पर बनाई गई है। फिल्म के बारे में अनिल ने बताया कि फिल्म में हमने देश के 12 करोड़ बच्चों का भविष्य दिखाया है। बच्चों की सुविधा के लिए सरकार ने योजना तो बनाई है लेकिन यह उन तक ठीक तरीके से नहीं पहुंच पा रही है। सरकार ने तो योजना अच्छी बनाई, सब कुछ इंतजाम भी कराया जा रहा है परंतु बच्चों तक यह सब कुछ नहीं पहुंच रहा है। वहीं हम इस योजना को सुधारने के लिए क्या कर सकते हैं, सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को हमने फिल्म में दिखाया है।
अनिल ने बताया कि फिल्म को बनाने से पहले मैंने खुद कई राज्यों के स्कूलों में जाकर देखा कि वहां पर यह योजना कैसे चलाई जा रही है। अक्सर हम सुनते हैं कि इस राज्य, जिला या फिर शहर को अपने उत्कृष्ठ कार्य के लिए पुरस्कार मिल रहा है लेकिन मिड डे मील इस श्रेणी में शामिल नहीं है। मिड डे मील के बारे में हमेशा हमें यही सुनने को मिलता है कि बच्चों को मिड-डे मील नहीं मिला या मिला तो उसमें गंदगी पाई गई या फिर किसी बच्चे की मिड डे मील खाने पर फुड-प्वाजनिंग हुई। देश के 40% बच्चे ऐसे हैं जिन तक मिड डे मील नहीं पहुंच पा रही है। जहां पहुंच रही वह खाने के लायक नही है। मैंने पर्सनली इन चीजों को देखा और समझा है, यह कॉन्सेप्ट मेेरे दिमाग में इसलिए आई क्योंकि यह महत्वपूर्ण सोशल सब्जेक्ट है जिसकी मुझे जरूरत थी, जो देश के लिए समाज के लिए और हमारे लिए जरूरी है।











