बिश्रामपुर। एसईसीएल क्षेत्र की लीज होल्ड भूमि पर बिना एनओसी के 2 करोड़ 50 लाख का कार्य तेजी से चल रही है। इस संबंध में एसईसीएल की स्वीकृति पर आरटीआई लगाया गया है।
जानकारी हो कि एसईसीएल की लीज होल्ड भूमि पर पूर्व से ही नगर पंचायत का कब्जा रहा है। नगर पंचायत द्वारा गत कई वर्षों से एसईसीएल की स्वामित्व भूमि पर अनाधिकृत निर्माण एवं मौन स्वीकृति की वजह भी कारण रही है। परंतु इस बार मामला 2 करोड़ 50 लाख के निर्माण कार्यों का है।
याचिकाकर्ता रामचंद्र राम द्वारा एसईसीएल से आरटीआई लगाकर जानकारी मांगी गई है कि क्या एसईसीएल ने अपनी लीज होल्ड भूमि पर उक्त कार्यों के लिए नगर पंचायत को किसी प्रकार का एनओसी जारी किया है या नहीं। साथ ही नगर पंचायत में भी आरटीआई दायर कर पूछा है कि क्या नगर पंचायत ने एनओसी प्राप्त कर कार्य प्रारंभ किया है या नहीं।
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में हाईकोर्ट द्वारा एसईसीएल की भूमि पर हो रहे बेजा कब्जा सहित निर्माण को तोडऩे एवं हटाने को लेकर पूर्व में ही आदेश जारी किया गया है। इसमें अब तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है परंतु नगर पंचायत द्वारा किए जा रहे 2 करोड़ 50 लाख के अनाधिकृत कार्यों के कारण मामला सुर्खीयों में है। सुुत्रों के मुताबिक याचिकाकर्ता द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए मुख्य महाप्रबंधक एसईसीएल, कलेक्टर सूरजपुर सहित सीएमओ नगर पंचायत को न्यायिक जवाबकर्ता बनाया गया है, अब माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का इंतजार है।
नागरिकों में नगर-पंचायत कार्यप्रणाली के खिलाफ रोष व्याप्त: नगर के वार्ड वासियों का कहना है कि जहां सडक़ अच्छी है, उस पर फिर से सडक़ निर्माण, नालीयों पर भी यही कथन। नागरिकों का यह भी कहना है कि क्षतिग्रस्त उद्देश्य ना पूरे कर जो नहीं चाहिए जबरन उन्ही कार्यों को किया जा रहा है। फलस्वरूप शासन की राशि बर्बाद तो की जा रही है, साथ ही घटिया निर्माण कर मोटा कमीशन का खेल भी किया जा रहा है।











