पब्लिक सेक्टर यूनिट के मजदूर कर्मचारियों पर कंपनी के अधिकारियों द्वारा प्रताड़ना झेलने पश्चात केंद्रीय श्रम न्यायालय में लंबे अंतराल के बाद भी न्यायाधीश नहीं। मजदूर कर्मचारियों की स्थिति अत्यंत दुःखद..
जबलपुर। यह तो स्पष्ट है कि हमारे भारत की न्यायिक व्यवस्था आज के दौर में काफी बदल चुकी है परंतु नजदीकी पड़ताल से यह भी लगातार सामने आ रही है कि न्यायालयों में न्याय का इंतजार करते-करते प्राण निकल जाना जारी है। फास्ट ट्रैक कोर्ट अधिकतम सुनने को ही मिलती है वही आपराधिक मामलों की स्थिति भिन्न है, अपितु हम महत्वपूर्ण विषय पर जनता की दबी हुई आवाज उसके मंजिल तक जरूर पहुंचाएंगे, ताकि यह असहनीय पीड़ा से जनहित में राहत हो।
यह दुखद विषय उस न्यायालय की है जो मजदूर कर्मचारियों के लिए खड़ी है। वह श्रमिक अपनी जिंदगी भर की खून से सनी मेहनतकश मूल्य के लिए अपने पूरे परिवार संग अपनी अत्यंत कष्टदायक विकट परिस्थिति पर होने मजबूर है। हजारों मजदूर कर्मचारियों के साथ लगातार यह स्थिति केंद्रीय श्रम न्यायालय (CGIT) जबलपुर की है जहां दिसंबर-2022 में न्यायाधीश महोदय की सेवानिवृत्त पश्चात अप्रैल-2023 माह तक इस महत्वपूर्ण स्थान पर अब तक नए न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ज्ञात हो कि इस अंतराल में कई केस अपनी पुरानी स्थिति पर कायम है। लंबे अंतराल के बाद भी नए न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं होने के कारण कई मामले लंबित हैं।
प्रार्थी मजदूर कर्मचारियों की स्थिति इतनी पीड़ादायक है कि पड़ताल करने के बाद यह स्थिति सामने आई। पड़ताल के दौरान श्रमिकों की पीड़ा आत्महत्या तक पहुंच चुकी है। वहीं एक प्रार्थी तो अपने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या को मजबूर था उसे बड़ी मुश्किल से मना कर मीडिया द्वारा समस्या पर आवाज उठाने का ढ़ांढ़स दिया गया तब जाकर स्थिति सामान्य हुई। प्रार्थी इतना सहमा और डरा हुआ था उसने कहा कि कृपया मेरी यह स्थिति उजागर नहीं करना। इसके पश्चात पड़ताल जारी रखते हुए पता चला कि कई मामलों में तो पब्लिक सेक्टर यूनिट (PSU) के केंद्रीय कंपनियों के अधिकारियों के अत्याचार व प्रताड़ना के शिकार हम मजदूर लगातार बने जिसका मुख्य कारण है कि हमें कंपनी के अधिकारियों का प्रताड़ना अब तक झेलना पड़ रहा है और केंद्रीय श्रम न्यायालय जो कि केंद्रीय श्रम मंत्रालय द्वारा संचालित होता है, परंतु विकट स्थिति यह बनी बनी हुई है कि श्रम न्यायालय (CGIT) जबलपुर में न्यायाधीश पद लंबे समय से रिक्त है जो हमें अत्यंत ही दुखद अंजाम तक मजबूर कर चुका है।











