भागलपुर के गंगा नदी पर 1,710 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अगुवानी घाट सुल्तानगंज सड़क पुल का बड़ा हिस्सा रविवार शाम ढह गया… पुल निर्माण निगम करवा रहा था, जिसका ठेका एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को मिला था. पुल का 84 फीसदी काम पूरा हो चुका था। इस पर सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार पुल गिरने की जांच कर कड़ी कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुल के डिजाइन की कमियों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो पुल रविवार की शाम ढहा, वही पुल 2022 में भी टूटा था। मैंने अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसका निर्माण सही ढंग से नहीं हो रहा है, जिससे यह बार-बार गिर रहा है। विभाग इसे देखेगा और कार्रवाई की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि जब इससे पहले भी पुल गिरने की घटना हुई थी, तब भी हम आशंका में थे कि हमें सभी सिगमेंट की जांच करानी चाहिए। IIT रुड़की ने 30 अप्रैल 2022 में पुल गिरने का कारण आंधी तूफान बताया। हमें इसके डिजाइन में पहले से ही फॉल्ट लग रहा था, इसे पूरे तरीके से ध्वस्त करके फिर से कार्य प्रारंभ करने का हमारा निर्णय था। हम पहले क्लीयर थे कि इस ब्रिज को नए सिरे से बनाने में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा, IIT रुड़की की एक रिपोर्ट आ गई है, इस मामले में पूरी रिपोर्ट आ जाएगी। इस कार्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
भागलपुर में निर्माणाधीन पुल गिरने पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि पुल गिरने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, जो छुपेगी नहीं। इसकी जांच होनी चाहिए। बिहार सरकार धृतराष्ट्र की तरह आंख बंद न कर सभी पुल की सुरक्षा जांच कराएं। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि नीयत में जब खोट होगा तो नीति कैसे सफल होगी। एक बार सुलतानगंज के तरफ पुल गिरा था और आज खगड़िया की ओर गिरा है। कई पुल पुर्णिया में भी गिरे हैं, बिहार के अंदर यह कमीशनखोरी की प्रथा गुणवत्ता विहीन काम चरम पर है. जिसकी छवि दिखाई दे रही है।











