सरगुजा संभाग, अंबिकापुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में करीब 40 हजार क्विंटल चावल का घोटाला सामने आया है। सरगुुुजा जिले के ग्रामीण अंचल की 511 दुकान और शहरी क्षेत्र की 61 दुकानों में माह फरवरी-मार्च 2023 में खाद्य विभाग ने दुकानों की चावल स्टॉक भौतिक सत्यापन किया 15 जाकर स्थिति सामने आई। मार्च की स्थिति में 572 सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में करीब 40 हजार क्विंटल चावल गायब है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान से ऊंचे दाम पर चावल बेंचने के कारण इस मार्च 2023 में शत्-प्रतिशत दुकानों में ताला लग गया। सेल्समैन दुकान बंद कर फरार हैं। आम उपभोक्ताओं को फरवरी-मार्च 2023 में अपने कोटे के चावल नहीं मिल पा रहा है। सरगुजा जिले में शासकीय दुकानों के 3 करोड़ 80 लाख रुपए का चावल खुले बाजार में बेचकर सेल्समैन ने चावल की हेराफेरी की है। अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में संचालित 61 सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों में जांच में 5 हजार क्विंटल चावल गायब है, जो लगभग 50 लाख रुपए का होता है। 40 हजार क्विंटल चावल का स्टॉक में गायब होने के प्रमाण मिलने के बाद सभी दुकानों के सेल्समैनों में हड़कंप है और खाद्य विभाग ने इन सेल्समैनों से 24 मार्च तक इस गायब चावल को दुकान में लाकर स्टॉक मेंटेन करने का अल्टीमेटम खाद्य विभाग के अधिकारियों ने लिखित में दिया है, लेकिन अब तक 5 प्रतिशत सेल्समैन द्वारा भी बेचे गए चावल को सोसायटी में वापस नहीं किया गया और न ही खाद्य अधिकारी सरगुजा के पत्रों का कोई सतुंष्टप्रद जवाब दिया।
जनप्रतिनिधियों द्वारा कलेक्टर से शिकायत :
जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मांग कर कहा है कि 80 प्रतिशत दुकानों को जिले और अंबिकापुर के सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकानों को कांग्रेस समर्थित कार्यकर्ता संचालन कर रहे हैं। ऐसे में तत्काल सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकान का निरस्त कर तत्काल नई सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकानों को आवंटित कर संचालित किया जाए। वहीं भाजपा नेता आलोक दुबे ने बताया कि खाद्य अधिकारी ने अपने पत्र में इन सभी सेल्समैनों और समूहों को 24 मार्च तक अल्टीमेटम दिया है कि गायब चावल को जमा करें अन्यथा दुकान से गायब चावल का प्रतिकिलो वसूली पैनल रेट लगभग 47 रुपए प्रति किलो की दर से वसूली की जाएगी, जो 40 हजार क्विंटल का करीब 18 करोड़ 80 लाख होता है। शहरी क्षेत्र के 61 दुकानों का 5 हजार क्विंटल चावल की रिकव्हरी 2 करोड़ 35 लाख रुपए होती है। यह आम जनता की क्षति है जिसकी पूर्ती भ्रष्टाचारियों को करनी ही पड़ेगी।












