रायपुर। अधिकतम मामलों में यही देखा गया है कि यदि आप कहीं सूचना के तहत किसी जानकारी की मांग करते हैं तो सर्वप्रथम आपको यही प्रदर्शित होता है कि कोई भी अधिकारी सूचना देने मैं कई प्रकार से कतरने लगता है। ऐसे ही एक प्रकरण में पंकज राजपूत तत्कालीन वनमंडल अधिकारी महासमुंद वर्तमान पदस्थापना खैरागढ़ वनमंडल के विरुद्ध सूचना आयोग के आदेश उपरांत वन विभाग छग शासन ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एव अपील) नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ करने नोटिस जारी कर 15 दिना में जवाब मांगा है।
जानकारी मुताबिक़ जनवरी 2020 में रायपुर के आवेदक नितिन सिंघवी ने महासमुंद वनमंडल से हाथी द्वारा जनहानि और धनहानि की जानकारी के दस्तावेज मांगे थे। तत्कालीन जन सूचना अधिकारी सह डीएफओ मयंक पाण्डेय ने जवाब दिया कि दस्तावेजों की संख्या अधिक है, आकर अवलोकन कर लें। अवलोकन के पश्चात चिन्हित दस्तावेज निशुल्क प्रदाय कर दिए जाएंगे। मामला सूचना आयोग पंहुचा (प्रकरण क्र.ए/3066/2020)। सुनवाई के दौरान 15 फरवरी 2021 को आयोग को जन सूचना अधिकारी ने बताया कि जानकारी 94928 पेज में हो सकती है। आयोग ने आदेशित किया कि आवेदक को दस्तावेज मांगे जाने पर अवलोकन के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी निशुल्क प्रेषित करें। प्रधान मुख्य वन संरक्षक को शासन पर निशुल्क सूचना देने वाले दस्तावेजों की लागत दोषी अधिकारी से वसूल कर शासन के कोष में जमा करने के आदेश भी दिए थे।
आयोग के इस आदेश के बावजूद पंकज राजपूत के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जाने की जानकारी सूचना आयोग के समक्ष 2025 में लाने के बाद अवर सचिव सूचना आयोग ने शासन से सूचना आयोग के आदेश के पालन प्रतिवेदन की मांग की। इसके बाद वन एवं जलवायु विभाग ने 11 जुलाई 2025 को पंकज राजपूत वर्तमान पदस्थापना खैरागढ़ वनमंडल कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के कारण शो-कॉज नोटिस जारी कर 15 दिवस में जवाब मांगा है। नोटिस में लिखा गया है कि आपके द्वारा अपने कर्तव्यों के निष्पादन में लापरवाही बरती गई, जो अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के नियम 3 का उल्लंघन है। अतः कारण बताएं कि क्यों ना उक्त कृत के लिए आपके विरुद्ध अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाए।












