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आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार में 74 लाख रूपय गबन : जिले के शिक्षा अधिकारी पर होती है कितनी अहम जिम्मेदारी?..

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हम बखूबी जानते हैं की इतिहास से आज तक शिक्षा का क्या महत्व रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की घोटाले बाजी अत्यंत शर्मनाक है। इस तरह के महत्वपूर्ण खबरों को संपादित करने के लिए मीडिया कर्मियों को कई तरह की पीड़ा व अपमान का सामना करना पड़ता है, हमारे पड़ताल के दौरान राज्यों के कई स्कूलों में कक्षा नवमी व दसवीं के छात्रों को गणित के जोड़ घटाव करने में असमर्थता देखी और ऐसे भी जिला शिक्षा अधिकारी देखें जिसे अंग्रेजी की एक दो शब्द बोलने पर अशिक्षित बेशर्मों की तरह व्यवहार, यह अपने पद का नाम बड़े गर्व से बताते कि हम DEO हैं परंतु ऐसे मूर्ख जो जिले भर के शिक्षा के अधिकारी हैं जो अंग्रेजी विषय भी पढ़ाते हैं और जो व्यक्ति जिले का शिक्षा अधिकारी समझकर अंग्रेजी बोल बैठता है उसे तत्काल अपमानित करते हैं। वही घोटालों के कुछ पेपर भी अंग्रेजी में होते हैं जिस पर वह हस्ताक्षर करते हैं।

 

रायपुर। राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में 74 लाख रुपए की गड़बड़ी के कारण राज्य शासन ने रायपुर के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जी.आर.चन्द्राकर के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। कई स्तर पर हुई जांच में राशि आबंटन में गड़बड़ी शाबित होने के बाद शासन ने कार्रवाई करने निर्देशित दिए। पूर्व कांग्रेस सरकार के समय इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी के आदेश पर अवर सचिव आरपी वर्मा ने इस मामले में कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

जानकारी मुताबिक़ कुछ स्कूल अस्तित्व में ही नहीं थे और लाखों रुपए जारी कर दिए गए, इसी तरह दो तीन स्कूल प्रबंधन के बजाय व्यक्ति के निजी खाते में राशि जमा की गई। आरटीई की राशि में धोखाधड़ी को लेकर शिकायत हुई तो स्कूल शिक्षा विभाग ने अलग-अलग स्तर पर जांच कराई, इसके बाद पूरे मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जाँच पूर्ण होने के पश्चात राशि में हेराफेरी प्रमाणित हुई और पूर्व डीईओ दोषी पाए गए। पहली जांच तत्कालीन संभागीय संयुक्त संचालक एस. के. भारद्वाज ने की, जांच में पाया गया कि जिन लोगों के खाते में रकम भेजी गई, उनमें से कुछ स्कूल काफी समय से बंद थे। वहीं कुछ स्कूलों के नाम पर व्यक्ति के निजी खाते में लाखों रुपए की राशि जमा कि गई। एक जांच जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से कर संचालनालय को रिपोर्ट भेजी गई, जिसमें बताया गया कि किस तरह जानबूझकर राशि दूसरों के खाते में अंतरित कराई गई और तीसरी जांच समग्र शिक्षा के पूर्व संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव ने जांच की, उन्होंने अपनी रिपोर्ट में आरटीई राशि के आबंटन में गड़बड़ी होने का जिक्र किया। वहीं आगे कि कार्यवाई जारी है।



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