रायपुर। छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले पर राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग के 22 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि यह घोटाला कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ था और इसकी जांच जारी है और घोटाले में जो भी ज़िम्मेदार पाए जाएंगे, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

बता दें कि शराब घोटाले के इस मामले में 29 आरोपियों को EOW की ओर से समन जारी किया गया था लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोई भी आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिस पर अदालत इन सभी आरोपियों को 20 अगस्त तक पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है। बीजेपी नेता नरेश गुप्ता ने इस मामले की शिकायत भारत सरकार तक पहुंचाई थी, जिसके बाद इस मामले की जांच तुल पकड़ी।

गौरतलब है कि राज्य में शासकीय शराब दुकानों के माध्यम से बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री के खुलासे के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) ने इस घोटाले की जांच में बड़ी कार्यवाई करते हुए चतुर्थ पूरक चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया है।

EOW/ACB द्वारा अब तक की गई जांच और 200 से अधिक व्यक्तियों के बयान एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत 2174 करोड़ रुपये से अधिक है। पहले इस घोटाले का अनुमान 2174 करोड़ रुपये था लेकिन नए आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।

इस प्रकरण में अब तक अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, कवासी लखमा, विजय भाटिया सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। FIR के अनुसार 70 आरोपी नामजद हैं। चतुर्थ पूरक चालान की प्रस्तुति हेतु न्यायालय ने आरोपियों को नोटिस जारी किए थे लेकिन वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। इस मामले की जांच में अब तक यह सामने आया है कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, सहयोगियों और ठेकेदारों के माध्यम से यह सुनियोजित घोटाला किया गया। इस घोटाले से प्राप्त रकम को व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों में खर्च किया गया, जिससे उन्हें अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। अब तक तीन पूरक अभियोग पत्रों सहित कुल चार अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
EOW और ACB द्वारा अब भी इस मामले की गहनता से जांच जारी है, जिसमें विदेशी शराब में लिये गये सिंडीकेट कमीशन, धन शोधन के नेटवर्क और राज्य स्तरीय समन्वय तंत्र की परतें खोली जा रही हैं।












