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स्कूल शिक्षा मंत्री के संभाग में शिक्षा की यह दयनीय स्थिति, जनता अब जरूर पुछेगी : शिक्षा का नींव “प्राथमिक शाला” पर 2016 से यही माजरा..

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योजनाओं को बनाना सफलता की पहली सीढ़ी है पर उसका उचित समन्वय कायम रखना मुख्यत: जरूरी ही नहीं बल्कि अनिवार्य है अन्यथा बड़े पैमाने पर राजनीति विज्ञापन मात्र है।
अम्बिकापुर। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने तमाम कोशिशें स्वभाविक ही होनी चाहिए। स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल सैकड़ों की संख्या में लगातार इजाफा राज्य सरकार द्वारा की जा रही है वहीं सबसे महत्वपूर्ण विषय पर गौर ही नहीं कि बच्चों के शैक्षणिक नींव कमजोर है सर्वप्रथम बच्चों का आधार जो कि प्राथमिक शिक्षा है, जिसे मजबूत की जाये।
ज्ञात हो कि स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल के परीक्षा परिणाम में उत्तीर्ण होने के वास्तविक औसत काफी कम अतः दयनीय है, जिसका मुख्य कारण प्राथमिक शिक्षा ही इतनी कमजोर है और बड़ी कक्षा में जाने पर स्वतः पढ़ाई का बोझ बन जाना सचमुच बच्चों पर अत्याचार जैसा प्रतीत होता है।
वैसे तो छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बोर्ड के जरिए हाईटेक शिक्षा दी जा रही है। वहीं सरगुजा जिले का एक गांव जहां आज पिछले कई सालों से पंचायत भवन में ही स्कूल और पीडीएस की दुकान संचालित हो रही है।

सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत रेवापुर में प्राइमरी स्कूल, पीडीएस दुकान और पंचायत के काम ग्राम पंचायत भवन में ही कई वर्षों से संचालित हो रही है। जिसमें पहली से  लेकर पांचवी के 54 बच्चे वर्तमान में पढ़ रहे हैं। एक ही भवन में पंचायत का कामकाज, पीडीएस वितरण और स्कूल संचालित हो रही है। जिससे भोले बच्चों के भविष्य के साथ स्पष्टतः खिलवाड़ किया जा रहा है।

 

पीडीएस संचालन, पंचायत कार्य से बच्चों की पढ़ाई हो रही बाधित :
ग्रामीणों के राशन लेने आने पर भीड़ की वजह से बच्चों की पढ़ाई में काफी दिक्कत आ रही है। सिर्फ ग्राम सभा होने पर समस्या आती थी लेकिन बाद में पीडीएस दुकान खुलने से समस्या और बढ़ गई है। यहां शिक्षकों का कहना है कि स्कूल के जर्जर होने के बाद 2016 से पंचायत भवन में स्कूल का संचालन हो रहा है। जिससे बच्चों को पढ़ाने में समस्या आ रही है। जिसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है।

प्रदेश में राज्य स्तर से जिला स्तर शिक्षा विभाग है अनजान :
इधर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस बात की जानकारी ही नहीं है। जिला शिक्षा अधिकारी कहते हैं कि जिले में 50 ऐसे विद्यालय है जो भवन विहीन है। मामला संज्ञान आने के बाद जांच कर आने वाले शिक्षा सत्र में नए भवन में स्कूल संचालित करने कि बात कही जा रही है,इस तरह का वाकया कब तक निरंंतर जारी रहेगा संभाग के ही स्कूल शिक्षा मंत्री से जनता जरूूर पुछेेेगी।


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Author: writers team

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