रायपुर (क्राइम डेस्क)। डूमरतराई क्षेत्र की बेशकीमती जमीन को लेकर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। इस जमीन पर पहले से हक रखने वाली महिला ने पुलिस में शिकायत की है कि उसकी 2 एकड़ जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तीन बार बेचा गया। इसमें मृत व्यक्तियों के नाम से फर्जी पहचान पत्र बनवाकर मुख्तियारनामा तैयार किया गया। मामले में पाटन तहसील (दुर्ग) से फर्जी मुख्तियारनामे बनवाने, फर्जी आधार कार्ड और मृतक व्यक्तियों के नामों का गलत इस्तेमाल कर बैनामा रजिस्ट्री कराने का आरोप है।

पूरा मामला माना थाना क्षेत्र का है, जहां शिकायतकर्ता पुष्पा माखीजा ने पुलिस को बताया कि उनके पति शीतल माखीजा ने वर्ष 1990 में कमल विहार चौक के पास खसरा नंबर 235/18, 235/19 और 235/21 कुल 4 एकड़ जमीन खरीदी थी, जिसमें से दो एकड़ भूमि को बाद में 9 परिचितों के नाम मुख्तियारनामे के माध्यम से दर्ज किया गया था।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2017 में इन 9 में से 6 लोगों ने शेष 2 एकड़ भूमि को पुष्पा माखीजा के पक्ष में हस्तांतरित कर दिया था। जबकि बाकी बचे तीन व्यक्तियों में से एक शोभराज की मृत्यु वर्ष 2008 में, दूसरे अशोक कुमार की मृत्यु मई 2023 में और तीसरे राजलदास की मृत्यु जनवरी 2024 में हो चुकी थी।
पुष्पा माखीजा ने मार्च 2024 में पाया कि किसी प्रशांत शर्मा निवासी जोरापारा रायपुर ने इन मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी पहचान पत्र (आधार कार्ड) तैयार कर पाटन तहसील (दुर्ग) में एक फरवरी 2024 को फर्जी मुख्तियारनामा बनवाया और फिर गजानंद मेश्राम के नाम पर 22 फरवरी 2024 को रजिस्ट्री कर दी।
इसके बाद, उक्त भूमि को जुलाई 2024 में गजानंद मेश्राम द्वारा महेश गोयल और विशाल शर्मा के नाम बेच दिया गया और नामांतरण भी करा लिया गया, जबकि संबंधित तीन मुख्तियारदाता पहले ही दिवंगत हो चुके थे।
शिकायत के बाद FIR दर्ज
पुष्पा माखीजा ने इस संबंध में माना थाने में लिखित शिकायत दी। प्रारंभिक जांच के आधार पर धारा 420, 467, 468, 471 और 34 आईपीसी के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है और पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है।
पुष्पा माखीजा का कहना है कि उक्त भूमि को उन्होंने IDS स्कीम के अंतर्गत आयकर विभाग में घोषित किया था और उनके परिवार की भावी जरूरतों के लिए सुरक्षित रखी गई थी। अब यह फर्जीवाड़े के जरिए हड़प ली गई है।
मृतकों की जगह खड़ा किए फर्जी व्यक्ति
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस जमीन पर अधिकार रखने वाले नौ लोगों में से तीन—शोभराज (मृत्यु: 2008), अशोक कुमार (2023), राजलदास (2024)—अब जीवित ही नहीं हैं। बावजूद इसके, इनके नाम पर फर्जी व्यक्ति खड़े कर, फर्जी आधार कार्ड के ज़रिये मुख्तियारनामा 01 फरवरी 2024 को पाटन तहसील से तैयार कराया गया। इसके बाद, 22 फरवरी 2024 को गजानंद मेश्राम के नाम रजिस्ट्री की गई। जुलाई 2024 में मेश्राम ने उक्त ज़मीन को महेश गोयल और विशाल शर्मा को बेच दिया, और नामांतरण भी करा लिया गया।
✔️ क्या कहते हैं कानूनी जानकार?
“अगर कोई व्यक्ति मृत्यु के बाद भी दस्तावेजों में जीवित दिखाया जाता है और उसकी ओर से संपत्ति बेची जाती है, तो यह न केवल संपत्ति अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि फौजदारी अपराध भी है। ऐसे मामलों में संलिप्त सभी पर सख्त धाराएं लगाई जा सकती हैं।”
— शरद यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता, रायपुर जिला न्यायालय
📌 संपत्ति विवादों में ऐसे मामलों से सावधान रहें:
- रजिस्ट्री से पहले प्रॉपर्टी की वर्तमान स्थिति की जांच करें
- पुराने मुख्तियारनामे व दस्तावेजों की वैधता को सत्यापित करें
- रजिस्ट्री ऑफिस में मौजूद व्यक्ति की पहचान का मिलान करें
- आधार कार्ड और मृत्यु प्रमाण पत्र की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है










